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गुलज़ार की शायरी

तन्हाई शायरी

एक पुराना मौसम...

एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी,
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तनहाई भी।

~ गुलज़ार
एडमिन द्वारा दिनाँक 13.06.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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