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जिगर मुरादाबादी की शायरी

सैड शायरी

दरिया से प्यासा निकला...

तिश्नगी जम गई पत्थर की तरह होंठों पर,
डूब कर भी तेरे दरिया से मैं प्यासा निकला।

~ जिगर मुरादाबादी
एडमिन द्वारा दिनाँक 17.10.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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रोमांटिक शायरी

क़ातिल बना दिया...

लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दिया,
जिस दिल को तुमने देख लिया दिल बना दिया,
पहले कहाँ ये नाज़ थे, ये इश्वा-ओ-अदा,
दिल को दुआएँ दो तुम्हें क़ातिल बना दिया।

~ जिगर मुरादाबादी
एडमिन द्वारा दिनाँक 26.10.15 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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तारीफ़ शायरी

तेरा शबाब...

मेरी निगाह-ए-शौक़ भी कुछ कम नहीं मगर,
फिर भी तेरा शबाब तेरा ही शबाब है।

~ जिगर मुरादाबादी
एडमिन द्वारा दिनाँक 26.10.15 को प्रस्तुत | कमेंट करें
तारीफ़ शायरी

कुछ इस अदा से...

कुछ इस अदा से आज वो पहलू-नशीं रहे,
जब तक हमारे पास रहे हम नहीं रहे।

~ जिगर मुरादाबादी
Admin द्वारा दिनाँक 22.09.15 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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