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नज़ीर वाक़री की शायरी

हिंदी उर्दू ग़ज़ल

अपनी आँखों के समंदर मे...

अपनी आँखों के समंदर में उतर जाने दे,
तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे ।

ऐ नए दोस्त मैं समझूँगा तुझे भी अपना,
पहले माज़ी का कोई ज़ख़्म तो भर जाने दे ।

आग दुनिया की लगाई हुई बुझ जाएगी,
कोई आँसू मेरे दामन पर बिखर जाने दे ।

ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको,
सोचता हूँ कि कहूँ तुझसे मगर जाने दे ।

~ नज़ीर वाक़री
अपनी आँखों के समंदर मे शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 24.06.15 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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