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मुनीर नियाजी की शायरी

शिक़वा शायरी

मुझ से बहुत क़रीब है...

मुझसे बहुत क़रीब है तू फिर भी ऐ मुनीर,
पर्दा सा कोई मेरे तेरे दरमियाँ तो है...।

~ मुनीर नियाजी
एडमिन द्वारा दिनाँक 04.02.15 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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