होम / शायर : मुमताज़ राशिद

Read Shayari in Hindi

उसे चांदनी कहेंगे...


कभी दोस्ती कहेंगे कभी बेरुख़ी कहेंगे,
जो मिलेगा कोई तुझसा उसे ज़िन्दगी कहेंगे।

तेरा देखना है जादू तेरी गुफ़्तगू है खुशबू,
जो तेरी तरह चमके उसे रोशनी कहेंगे।

नए रास्ते पे चलना है सफ़र की शर्त वरना,
तेरे साथ चलने वाले तुझे अजनबी कहेंगे।

है उदास शाम राशिद नहीं आज कोई क़ासिद,
जो पयाम उसका लाए उसे चांदनी कहेंगे।

- मुमताज़ राशिद


एडमिन द्वारा दिनाँक 24.06.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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परछाइयों के शहर...


परछाइयों के शहर की तन्हाईयाँ ना पूछ...
अपना शरीक-ए-ग़म कोई अपने सिवा ना था ।

- मुमताज़ राशिद


विवेक सिंह द्वारा दिनाँक 20.02.15 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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परछाइयों के शहर की...


परछाइयों के शहर की तन्हाईयाँ ना पूछ;
अपना शरीक-ए-ग़म कोई अपने सिवा ना था।

- मुमताज़ राशिद


मनोज सिंह द्वारा दिनाँक 19.02.15 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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