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वसीम बरेलवी की शायरी

नफरत शायरी

तेरी नफरतों को प्यार...

तेरी नफरतों को प्यार की खुशबु बना देता,
मेरे बस में अगर होता तुझे उर्दू सीखा देता।

~ वसीम बरेलवी
एडमिन द्वारा दिनाँक 12.04.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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तारीफ़ शायरी

आपको देख कर देखता...

आपको देख कर देखता रह गया,
क्या कहूँ और कहने को क्या रह गया।

आते-आते मेरा नाम-सा रह गया,
उस के होंठों पे कुछ काँपता रह गया।

वो मेरे सामने ही गया और मैं,
रास्ते की तरह देखता रह गया।

झूठ वाले कहीं से कहीं बढ़ गये,
और मैं था कि सच बोलता रह गया।

आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे,
ये दिया कैसे जलता हुआ रह गया।

~ वसीम बरेलवी
एडमिन द्वारा दिनाँक 23.02.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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