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पड़ी जरुरत हमसफ़र की

( राजेन्द्र सोनवानी द्वारा दिनाँक 02-06-2016 को प्रस्तुत )
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ज़िन्दगी देने वाले यूँ मरता छोड़ गए,
अपनापन जताने वाले यूँ तनहा छोड़ गए,
जब पड़ी जरुरत हमें अपने हमसफ़र की,
तो साथ चलने वाले अपना रास्ता मोड़ गए.

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