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अपनी आज़ादी को हम...


( इन्दर पाल ठाकुर द्वारा दिनाँक 09.06.16 को प्रस्तुत )
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अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं,
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं।




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