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थोड़ी मस्ती थोड़ा सा

( एडमिन द्वारा दिनाँक 20-06-2016 को प्रस्तुत )
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थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ,
ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ,
कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकी-महकी यादें,
जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ।

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