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पलभर की भी तन्हाई...


( अमित व्यास द्वारा दिनाँक 23.06.16 को प्रस्तुत )
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पलभर की भी तन्हाई तुम्हें नसीब ना हो,
कोई भी गम तुम्हारे करीब ना हो,
रब तुम्हारी ज़िन्दगी में इतनी खुशियाँ दे,
कि तुमसे बढ़कर कोई खुशनसीब ना हो..




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