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ठोकरें ही इंसान को

( गगन शाक्य द्वारा दिनाँक 14-09-2016 को प्रस्तुत )
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शम्मा परवाने को जलना सिखाती है,
शाम सूरज को ढलना सिखाती है,
क्यों कोसते हो पत्थरों को जबकि...
ठोकरें ही इंसान को चलना सिखाती हैं।

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