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गुमनामी का अँधेरा

( एडमिन द्वारा दिनाँक 15-09-2016 को प्रस्तुत )
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गुमनामी का अँधेरा कुछ इस तरह छा गया है,
कि दास्ताँ बन के जीना भी हमें रास आ गया है।

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