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तुम अपनी निगहबानी...


( एडमिन द्वारा दिनाँक 15.09.16 को प्रस्तुत )
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मैं देखूँ तो सही यह दुनिया तुझे कैसे सताती है,
कोई दिन के लिए तुम अपनी निगहबानी मुझे दे दो।

- साहिर लुधियानवी



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