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जब भी करीब

( रंजीत राही द्वारा दिनाँक 26-09-2016 को प्रस्तुत )
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जब भी करीब आता हूँ बताने के किये,
जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये,
महफ़िलों की शान न समझना मुझे,
मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये.

जब भी करीब शायरी
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