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जहाँ कदर न हो

( एडमिन द्वारा दिनाँक 14-10-2016 को प्रस्तुत )
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जहाँ कदर न हो अपनी वहाँ जाना फ़िज़ूल है,
चाहे किसी का घर हो चाहे किसी का दिल।

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