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महफ़िल में हँसना

( दुर्गेश मिश्र द्वारा दिनाँक 15-10-2016 को प्रस्तुत )
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महफ़िल में हँसना हमारा मिजाज बन गया,
तन्हाई में रोना एक राज बन गया,
दिल के दर्द को चेहरे से जाहिर न होने दिया,
बस यही जिंदगी जीने का अंदाज बन गया।

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