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तकिये के लिहाफ में...


( प्रसून द्विवेदी द्वारा दिनाँक 29.10.16 को प्रस्तुत )
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तकिये के लिहाफ में छुपाकर रखी हैं तेरी यादें,
जब भी तेरी याद आती है मुँह छुपा लेता हूँ।




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