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चिराग बुझा दिया...


( एडमिन द्वारा दिनाँक 03.11.16 को प्रस्तुत )
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शब-ए-इंतज़ार की कशमकश में
न पूछ कैसे सहर हुई,
कभी एक चिराग जला दिया
कभी एक चिराग बुझा दिया।




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