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वहीं ठहरे हैं

( नयन नितीश तिवारी द्वारा दिनाँक 25-11-2016 को प्रस्तुत )
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कैसी बन गयी ये ज़िन्दगी,
न ठीक से जीने देती है न मरती है,
बस रुक गयी है एक पल में,
वक़्त तो बीतता जाता है,
पर हम वहीं के वहीं ठहरे हैं।

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