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दर्द की दौलत

( एडमिन द्वारा दिनाँक 26-11-2016 को प्रस्तुत )
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खुद को औरों की तवज्जो का तमाशा न करो,
आइना देख लो अहबाब से पूछा न करो,
शेर अच्छे भी कहो, सच भी कहो, कम भी कहो,
दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुसवा न करो।

दर्द की दौलत शायरी
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