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जुस्तजू का सिला

( एडमिन द्वारा दिनाँक 27-11-2016 को प्रस्तुत )
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हमें अपने घर से चले हुए,
सरे राह उमर गुजर गई,
न कोई जुस्तजू का सिला मिला,
न सफर का हक ही अदा हुआ।

जुस्तजू का सिला शायरी
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