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तन्हाई का एहसास...


( एडमिन द्वारा दिनाँक 27.11.16 को प्रस्तुत )
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फिर कहीं दूर से एक बार सदा दो मुझको,
मेरी तन्हाई का एहसास दिला दो मुझको,
तुम तो चाँद हो तुम्हें मेरी ज़रुरत क्या है,
मैं दिया हूँ किसी चौखट पे जला दो मुझको।

तन्हाई का एहसास



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