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रात गुज़ारी तड़प कर...


( एडमिन द्वारा दिनाँक 29.11.16 को प्रस्तुत )
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कहीं किसी रोज़ यूँ भी होता,
हमारी हालत तुम्हारी होती,
जो रात हमने गुज़ारी तड़प कर,
वो रात तुमने गुज़ारी होती।

रात गुज़ारी तड़प कर



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