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दिल सफर में है...


( गणपत खिची द्वारा दिनाँक 29.11.16 को प्रस्तुत )
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तमाम लोगों को अपनी अपनी मंजिल मिल चुकी,
कमबख्त हमारा दिल है, कि अब भी सफर में है।




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