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शिकवे तो कम नहीं...


( राजेश कुमार वर्मा द्वारा दिनाँक 29.11.16 को प्रस्तुत )
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घुट घुट के जी रहा हूँ तेरी नौकरी में ऐ दिल,
बेहतर तो होगा अब तू कर दे मेरा हिसाब,
शिकवे तो कम नहीं है पर क्या करुं शिकायत,
कहीं हो न जाएं तुझसे रिश्ते मेरा खराब।




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