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मेरी दर्द भरी रातें...


( एडमिन द्वारा दिनाँक 07.12.16 को प्रस्तुत )
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सजा कैसी मिली मुझको तुमसे दिल लगाने की,
रोना ही पड़ा है जब कोशिश की मुस्कुराने की,
कौन बनेगा यहाँ मेरी दर्द-भरी रातों का हमराज,
दर्द ही मिला जो तुमने कोशिश की आजमाने की।




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