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दर्द हमको देने लगे

( पुष्पेंद्र कुमार द्वारा दिनाँक 15-12-2016 को प्रस्तुत )
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जिसको दिल में बसाया हमने वो दूर हमसे रहने लगे,
जिनको अपना माना हमने वो पराया हमको कहने लगे।

जो बने कभी हमदर्द हमारे वो दर्द हमको देने लगे,
जब लगी आग मेरे घर में तो पत्ते भी हवा देने लगे।

जिनसे की वफ़ा हमने वो बेवफा हमको कहने लगे,
जिनको दिया मरहम हमने वो जखम हमको देने लगे।

बचकर निकलता था काँटों से मगर फूल भी जखम देने लगे,
जब लगी आग मेरे घर में तो पत्ते भी हवा देने लगे।

बनायीं जिनकी तस्वीर हमने अब चेहरा वो बदलने लगे,
जो रहते थे दिल में मेरे अब महलों में जाकर रहने लगे।

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