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हर शाम अधूरी

( साबिया खान द्वारा दिनाँक 15-12-2016 को प्रस्तुत )
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इक दर्द छुपा हो सीने में मुस्कान अधूरी लगती है,
न जाने क्यूँ बिन तेरे... हर शाम अधूरी लगती है।

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