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फुर्सत मिले जब भी

( एडमिन द्वारा दिनाँक 09-06-2015 को प्रस्तुत )
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फुर्सत मिले जब भी तो रंजिशे भुला देना,
कौन जाने साँसों की मोहलतें कहाँ तक हैं।

फुर्सत मिले जब भी शायरी
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