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साँसे मेरी ना थीं

( विनोद सिन्हा सुदामा द्वारा दिनाँक 24-12-2016 को प्रस्तुत )
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मालूम था कि मेरी साँसे मेरी ना थीं कभी,
बस इक शौक था उसके साथ जीने का।

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