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वफ़ा में अब यह हुनर

( एडमिन द्वारा दिनाँक 14-06-2015 को प्रस्तुत )
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वफ़ा में अब यह हुनर इख़्तियार करना है,
वो सच कहें या ना कहें बस ऐतबार करना है,
यह तुझको जागते रहने का शौक कबसे हो गया,
मुझे तो खैर बस तेरा इंतज़ार करना है ।

वफ़ा में अब यह हुनर शायरी
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