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ये दिलबरी ये नाज़

( एडमिन द्वारा दिनाँक 31-12-2016 को प्रस्तुत )
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ये दिलबरी, ये नाज़, ये अंदाज़, ये जमाल,
इंसान करे अगर न तेरी चाह... क्या करे।

~ अकबर इलाहाबादी
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