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ज़िन्दगी से मेरी आदत

( एडमिन द्वारा दिनाँक 15-06-2015 को प्रस्तुत )
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ज़िन्दगी से मेरी आदत नहीं मिलती,
मुझे जीने की सूरत नहीं मिलती,
कोई मेरा भी कभी हमसफ़र होता,
मुझे ही क्यूँ मुहब्बत नहीं मिलती ।

ज़िन्दगी से मेरी आदत शायरी
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