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डर मुझे भी लगा

( पंकज कुमार द्वारा दिनाँक 02-07-2015 को प्रस्तुत )
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डर मुझे भी लगा फांसला देख कर,
पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर,
खुद ब खुद मेरे नज़दीक आती गई,
मेरी मंज़िल मेरा हौंसला देख कर ।

डर मुझे भी लगा शायरी
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