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सारी दूनिया के रूठ

( एडमिन द्वारा दिनाँक 03-07-2015 को प्रस्तुत )
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सारी दूनिया के रूठ जाने से
मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता,
बस एक तेरा खामोश रहना
बहुत तकलीफ देता है ।

सारी दूनिया के रूठ शायरी
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