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हक़ीक़त ना सही तुम

( एडमिन द्वारा दिनाँक 03-07-2015 को प्रस्तुत )
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हक़ीक़त ना सही तुम
ख़्वाब की तरह मिला करो,
भटके हुए मुसाफिर को
चांदनी रात की तरह मिला करो ।

हक़ीक़त ना सही तुम शायरी
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