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शीशे सा बदन लेकर

( एडमिन द्वारा दिनाँक 07-07-2015 को प्रस्तुत )
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शीशे सा बदन लेकर यूँ
निकला ना करो राहों में,

पत्थर से छुपे होते हैं
यहाँ लोगों की निगाहों में ।

शीशे सा बदन लेकर शायरी
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