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ग़म कोई समझ न पाया

( दीपक सोनी गोहपारू द्वारा दिनाँक 24-05-2017 को प्रस्तुत )
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एक हसरत थी सच्चा प्यार पाने की,
मगर चल पड़ी आँधियां जमाने की,
मेरा ग़म तो कोई ना समझ पाया,
क्यूंकि मेरी आदत थी सबको हँसाने की।

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