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काँच की तरह

( समीर राज द्वारा दिनाँक 19-06-2017 को प्रस्तुत )
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टूटे हुए काँच की तरह
चकना-चूर हो गया हूँ
किसी को चुभ न जाऊँ
इसलिए सबसे दूर हो गया हूँ।

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