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खुशिओं का कारोबार

( वसीम द्वारा दिनाँक 22-06-2017 को प्रस्तुत )
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हम तो खुशियाँ उधार देने का
कारोबार करते हैं... साहब

कोई वक़्त पे लौटाता नहीं है
इसलिए घाटे में हैं..!

खुशिओं का कारोबार शायरी
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