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हर रात रो रो के

( पंकज कुमार द्वारा दिनाँक 11-07-2015 को प्रस्तुत )
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हर रात रो-रो के उसे भुलाने लगे,
आंसुओं में उस के प्यार को बहाने लगे,
ये दिल भी कितना अजीब है कि,
रोये हम तो वो और भी याद आने लगे ।

हर रात रो रो के शायरी
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