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मजबूरियॉ ओढ़ के

( एडमिन द्वारा दिनाँक 11-07-2015 को प्रस्तुत )
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मजबूरियॉ ओढ़ के निकलता हूं घर से आजकल,
वरना शौक तो आज भी है बारिशों में भीगनें का ।

मजबूरियॉ ओढ़ के शायरी
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