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आग चाहत की

( एडमिन द्वारा दिनाँक 12-07-2017 को प्रस्तुत )
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नजर से क्यूँ जलाते हो आग चाहत की,
जलाकर क्यूँ बुझाते हो आग चाहत की,
सर्द रातों में भी तपन का एहसास रहे,
हवा देकर बढ़ाते हो आग चाहत की।

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