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जनाज़ा दीवाने का

( एडमिन द्वारा दिनाँक 14-07-2017 को प्रस्तुत )
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लिया हो जो न आपने ऐसा कोई इम्तिहान न रहा,
इंसान आखिर मोहब्बत में इंसान न रहा,
है कोई बस्ती जहाँ से न उठा हो जनाज़ा दीवाने का,
आशिक की कुर्बत से महरूम कोई कब्रिस्तान न रहा।

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