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लिख दूं किताबें तेरी

( Admin द्वारा दिनाँक 22-09-2015 को प्रस्तुत )
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लिख दूं किताबें तेरी मासूमियत पर
फिर डर लगता है...
कहीं हर कोई तेरा तलबगार ना हो जाय ।

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