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ख़ाक उड़ती है रात

( एडमिन द्वारा दिनाँक 23-09-2015 को प्रस्तुत )
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ख़ाक उड़ती है रात भर मुझमें...
कौन फिरता है दर-ब-दर मुझमें,
मुझ को मुझमें जगह नहीं मिलती...
कोई मौजूद है इस क़दर मुझमें ।

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