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तन्हाई में आँखों से

( विशाल बाबू द्वारा दिनाँक 27-09-2017 को प्रस्तुत )
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कहीं पर शाम ढलती है कहीं पर रात होती है,
अकेले गुमसुम रहते हैं न किसी से बात होती है,
तुमसे मिलने की आरज़ू दिल बहलने नहीं देती,
तन्हाई में आँखों से रुक-रुक के बरसात होती है।

~ विशाल बाबू
तन्हाई में आँखों से शायरी
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