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मंजिल भी उसी की थी

( रीता वर्मा द्वारा दिनाँक 13-10-2017 को प्रस्तुत )
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मंजिल भी उसी की थी रास्ता भी उसका था,
एक हम अकेले थे काफिला भी उसका था,
साथ साथ चलने की कसम भी उसी की थी,
और रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था।

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