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जहाँ दरिया कहीं अपने किनारे

( एडमिन द्वारा दिनाँक 04-02-2015 को प्रस्तुत )
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जहाँ दरिया कहीं अपने किनारे छोड़ देता है,
कोई उठता है और तूफाँ का रुख मोड़ देता है,
मुझे बे-दस्त-ओ-पा कर के भी खौफ उसका नहीं जाता,
कहीं भी हादसा गुज़रे वो मुझसे जोड़ देता है।
(बे-दस्त-ओ-पा = असहाय)

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