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ग़म-ए-इश्क रह गया

( एडमिन द्वारा दिनाँक 02-12-2017 को प्रस्तुत )
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ग़म-ए-इश्क रह गया है ग़म-ए-जुस्तज़ू में ढलकर,
वो नजर से छुप गए हैं मेरी जिंदगी बदल कर।

ग़म-ए-इश्क रह गया शायरी
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